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1. उत्‍तम शिक्षा - उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्‍ता में वृद्धि

2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर 67.68% है। यद्यपि यूपी में प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की नामांकन दर काफी प्रभावी 94% है, लेकिन चिंता की बात यह है कि शिक्षा की खराब गुणवत्ता के साथ ही 11.85% छात्र बीच में ही पढ़ाई भी छोड़ देते हैं। उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां प्रति छात्र व्यय में 25% की वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी तरफ कक्षा 3 में पढ़ने वाले छात्रों का अनुपात 2012 के 27.1% से घटकर 2016 में 15.7% रह गया है। ए॰एस॰ई॰आर॰ 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे सभी छात्र जिनका कक्षा 5 में दाखिला हुआ है, उनमें से आधे छात्र ही कक्षा 2 की किताबें पढ़ सकते हैं। पिछले कुछ सालों में सीखने के स्तर में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

शिक्षा पर खर्च तो बढ़ा है, लेकिन इसके अनुपात में छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति बेहतर नहीं हो पाई है। 2016 में हुए एक सर्वेक्षण में दिन में लगभग 55.8% छात्र उपस्थित थे। अब भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, जैसे पीने का पानी और शौचालय आदि आर॰टी॰ई॰ कानून के अनुरूप नहीं हैं।

प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में बदलाव कैसे लाया जा सकता है ? छात्रों के सीखने के स्तर को उन्नत करने में टेक्नॉलजी क्या भूमिका निभा सकती है ? प्राथमिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे किया जा सकता है?

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2. स्‍वच्‍छ उत्‍तर प्रदेश - उत्तर प्रदेश को खुले में शौच मुक्त बनाने में नागरिकों की भूमिका

उत्तर प्रदेश के नागरिकों में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, खुले में शौच आम बात है और संक्रामक बीमारियों को फैलाने और तथा बच्चों के खराब स्वास्थ्य के लिए यह जिम्‍मेदार है। यह महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है। वर्ष 2015 की स्वच्छता रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 52.1% ग्रामीण आबादी अब भी खुले में शौच जाती है। हालांकि शौचालय की उपलब्‍धता भी एक मुद्दा है, लेकिन भारत सरकार की शौचालय निर्माण योजना ने लक्ष्य से अधिक शौचालय बनवाए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश को दिसंबर 2018 तक खुले में शौच मुक्‍त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

लोगों को शौचालयों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना मुश्किल साबित हो रहा है क्‍योंकि उनकी संस्‍कृति और संस्‍कार इसकी इजाजत नहीं देते। पांच राज्यों (इनमें उत्‍तर प्रदेश भी) के 47% ग्रामीण परिवारों ने कहा कि वे खुले में शौच जाना इसलिए पसंद करते हैं क्‍योंकि यह उनके लिए ‘सुखद, आरामदायक और सुविधाजनक’ है।

लोगों का रवैया, व्यवहार बदलने और उनको स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने के लिए समुदाय को कैसे शामिल किया जा सकता है ? स्वच्छता के प्रति अनुपालन कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है ?

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3. कृषि कल्‍याण - 2022 तक उत्तर प्रदेश के किसानों की आय दोगुनी

भारत एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है, जिसमें अधिकतर लोगों की आजीविका इसी पर निर्भर है। हालांकि, इस क्षेत्र में कम और अस्थिर वृद्धि तथा किसानों की कम आय के कारण लोग अब खेती से मुंह मोड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश, जहां 78% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, आज भी कृषि पर निर्भर है। उसका मानव विकास सूचकांक (HDI) में भारत के 23 राज्यों में 18वां स्थान है। यह खेती पर निर्भर लोगों की स्थिति दिखाने के लिए पर्याप्‍त है, जिनमें से ज्‍यादातर किसान हैं।

किसान खेती का काम करना जारी रखें, इसके लिए आवश्‍यक है कि उनकी आय अन्य समान नौकरियों से भले ही अधिक न हो, लेकिन कम से कम उनके बराबर जरूर हो। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए काम करने का फैसला किया है। हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए ? इस संबंध में सरकार द्वारा किस तरह के नीतिगत परिवर्तनों को अपनाना चाहिए ? किसानों को कृषि के अलावा अन्य सहयोगी गतिविधियों को भी अपनाने के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है ?

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4.डिजिटल उत्‍तर प्रदेश - उत्तर प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंचाने के लिए टेक्नॉलजी का इस्‍तेमाल करना

उत्तर प्रदेश में लोगों तक इंटरनेट की पहुंच बहुत कम है – प्रति 100 व्‍यक्ति में 17.97 व्यक्ति (सितंबर, 2016 तक)। भारत में कुल मिलाकर लगभग 31% लोगों तक इंटरनेट की पहुंच है (इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशनन ऑफ इंडिया के अनुसार)। डिजिटलीकरण को अपनाने में उत्‍तर प्रदेश काफी पिछड़ गया है और इसकी वजह से राज्‍य को अपनी पूर्ण ई-गवर्नेंस क्षमता तक पहुंचने और कल्‍याणकारी योजनाओं के ठीक ढंग से लागू होने में बाधा हो सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा मोबाइल फोन पहुंच के साथ राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है। यह सरकार और जनता के लिए फायदेमंद होगा कि वे कल्याणकारी योजनाओं को सही लोगों तक पहुंचाने और इस प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस संसाधन का इस्‍तेमाल करें। सरकार से संबंधित जानकारी को आसानी से इस माध्यम से प्रसारित किया जा सकता है। इसके लिए इंटरनेट तक लोगों की पहुंच बढ़ाना और इंटरनेट को सुलभ व सस्‍ता बनाना आवश्यक होगा।

उत्तर प्रदेश में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, इंटरनेट का उपयोग कैसे बढ़ाया जा सकता है ? मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या के बावजूद इंटरनेट का इस्तेमाल करने में बाधा क्या है ? जनता को जानकारी प्रदान करने के लिए सरकार इस संसाधन का कैसे उपयोग कर सकती है और नौकरशाही व लालफीताशाही को कम करते हुए कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर प्रसार में इंटरनेट का इस्‍तेमाल कैसे किया जा सकता है?

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5. पारदर्शी प्रदेश - उत्तर प्रदेश में शासन में शून्य भ्रष्टाचार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 16 एशिया प्रशांत देशों में से भारत में रिश्वत की दर सबसे ज्यादा है। 10 भारतीयों में करीब 7 लोगों ने सार्वजनिक सेवाओं के लिए रिश्वत दी, जबकि जापान में यह दर महज 0.2% थी।

भ्रष्टाचार हमेशा लेनदेन लागत में वृद्धि, अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, कम दक्षता और सामाजिक और आर्थिक विकास में असमानता को बढ़ावा देता है। इससे सबसे ज्‍यादा प्रभावित गरीब लोग होते हैं, जो रिश्वत की मांगों को पूरा करने में असमर्थ होते है और उनकी पहुंच सार्वजनिक सेवाओं तक नहीं हो पाती। उत्तर प्रदेश में सीएमएस इंडिया द्वारा 2017 में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल केवल 18% लोगों ने सार्वजनिक भ्रष्टाचार का खुलासा करने के साधन सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के बारे में सुना था।

यवस्‍था में नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने के लिए टेक्नॉलजी का इस्‍तेमाल कैसे किया जा सकता है ? पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को निचले स्तर तक कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है ? भ्रष्टाचार को रोकने में नागरिक क्या भूमिका निभा सकते हैं ? लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए कि वे आर॰टी॰आई॰ अधिनियम, 2005 के तहत सरकारी सूचनाएं पाने के हकदार हैं, सार्वजनिक जागरूकता कैसे बढ़ाई जा सकती है ?

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6. स्‍वस्‍थ घर-परिवार - पूरे उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की पहुंच को सक्षम बनाना

ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी रिपोर्ट, 2016 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1346 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। आंकड़ों में यह भी कहा गया है कि मातृ मृत्यु दर और बाल मृत्यु दर के मामले में उत्‍तर प्रदेश का रिकॉर्ड सबसे अधिक है, जहां जन्‍म लेने वाले प्रति 1000 बच्‍चों में 64 की मौत हो जाती है और 35 बच्चे जन्म के बाद एक महीने से ज्यादा जीवित नहीं रहते हैं।

भारत में सभी संचारी और गैर-संचारी बीमारियों से होने वाली मौतों में उत्तर प्रदेश की हिस्‍सेदारी सबसे अधिक है। आज उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार की अत्‍यंत आवश्यकता है, क्योंकि उपलब्ध प्राथमिक देखभाल सुविधाओं में सुधार करके मृत्यु दर काफी कम की जा सकती है। यह आवश्यक है कि राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर अधिक ध्यान देते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति में सुधार किया जाए, क्योंकि सामाजिक इकाई परिवारों के साथ शुरू होती है।

राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के वर्तमान मुद्दे क्या हैं ? प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सस्ती प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की पहुंच कैसे सुनिश्चित की जा सकती है ? अस्पतालों में बेहतर डॉक्टरों और दवाओं की उपलब्धता के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए ? सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा को बनाए रखने के लिए टेक्नॉलजी का इस्‍तेमाल कैसे किया जा सकता है ?

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7. सुरक्षित प्रदेश – समृद्ध उत्तर प्रदेश के लिए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना

उत्तर प्रदेश ने लंबे समय तक अपराध और अपराधियों के भारी आघात का सामना किया है, जिससे राज्य के लोगों के बीच भय का माहौल और असुरक्षा पैदा होती है। अकेले 2015 में, यूपी में हिंसक अपराधों के कुल 40,613 मामले दर्ज किए गए (इनमें हत्‍या के 4700 मामले) जो देश में दर्ज कुल हिंसक अपराधों के 12.1% से अधिक थे। स्‍पेशल और लोकल लॉ क्राइम के मामले में भी यूपी सबसे आगे रहा, जहां देश में रिपोर्ट किए गए कुल अपराधों में से 58.2% यूपी में हुए।

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ छेड़खानी की घटनाओं और अन्‍य अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वर्ष 2015 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 35,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे और बहुत से ऐसे मामले थे जिनमें पीडि़तों ने भय के कारण रिपोर्ट ही नहीं दर्ज कराई या फिर पुलिस ने ही शिकायत दर्ज नहीं की। इसके कारण राज्य में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रति आम लोगों का विश्वास बहुत कम हो गया है, साथ ही इससे राज्य की अर्थव्यवस्था का विकास भी प्रभावित हो रहा है।

राज्य में पुलिस में कैसे सुधार किया जा सकता है ? पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह से नागरिकों के अनुकूल कैसे बनाया जा सकता है ? अपराध से निपटने के लिए पुलिस और समुदाय के बीच समन्वय में सुधार कैसे लाया जा सकता है ? अपराधों की जांच और समय पर कार्रवाई करने में टेक्नॉलजी का लाभ कैसे उठाया जा सकता है ?

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8. अंत्‍योदय से सर्वोदय – राज्य के वंचित और हाशिए पर मौजूद आबादी को सशक्त बनाना

अर्थव्यवस्था के विकास की धीमी दर, समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों को किसी अन्‍य चीज की तुलना में सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। इन वर्गों के लिए आर्थिक विकास के लाभों को उपलब्ध कराने के लिए समावेशी नीतियों को स्वीकार करना आवश्यक है। यह यूपी के मामले में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां लगभग 24% आबादी अनुसूचित जाति से है, जिनमें से 44% से अधिक गरीबी रेखा के नीचे रहती है। इसी प्रकार, 33% से अधिक अन्य परिवार गरीबी रेखा से नीचे हैं। अनुसूचित जाति और बीपीएल परिवारों की स्थिति भी मानव विकास के संकेतकों पर अत्‍यंत खराब है जिससे गरीबी को और बढ़ावा मिलता है।

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान के लिए समाज के इन वर्गों को सशक्त बनाने और उन्‍हें शामिल करने के लिए कदम उठाना होगा। आर्थिक विकास में उनकी उचित भागीदारी हो, इसके लिए टिकाऊ और समावेशी उपायों की आवश्यकता है जो उन्‍हें लाभदायक रोजगार, स्‍थायी आय के अवसर और बेहतर सामाजिक सेवाओं तक पहुंचने के साधन उपलब्‍ध कराए।

विभिन्न मौजूदा योजनाओं के तहत वंचित वर्ग को बेहतर तरीके से लक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं ? सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में इन वर्गों के सामने आने वाली बाधाओं को कैसे दूर करना है ? लाभप्रद गतिविधियों में इन वर्गों की अधिक भागीदारी संभव हो सके, इसके लिए किन नए उपायों की जरूरत है ? सामाजिक परिवर्तन के माध्यम से समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों में सामाजिक उत्थान कैसे लाया जा सकता है?

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9. जन भागीदारी – शासन के साथ उत्तर प्रदेश के नागरिकों की भागीदारी

सरकार को अधिक प्रभावी और मैत्रीपूर्ण बनाने में नागरिकों का अनुभव महत्वपूर्ण निमित्‍त है। ये जरूरी है कि सरकारी प्रक्रियाओं का पुनर्विन्‍यास इस तरीके से किया जाए कि सरकार और जनता की बातचीत का केंद्र आम आदमी हो जिससे नागरिकों को पर्याप्‍त सेवा और सुविधाएं मिलना सुनिश्चित हो सके। सिटीजन चार्टर और सार्वजनिक सेवा वितरण कानून की मदद से इन सुविधाओं के मानक तय किए जा सकते हैं। शिकायतों के निस्‍तारण के लिए सरकारी तंत्र लोगों की प्रतिक्रिया जानने का एक अच्‍छा तरीका है।

इसी तरह, सरकारी सेवाओं और नीतियों के प्राथमिक उपयोगकर्ताओं के रूप में, नागरिकों की आवाज की योजनाओं व नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका है। नीतियां बनाने में नागरिकों के परामर्श और उनकी सहभागिता का स्तर जितना उच्च होगा, नीतियों की सफलता की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

सरकार के साथ ना‍गरिकों की बातचीत सुविधाजनक बनाने में आई॰सी॰टी॰ (सूचना, संचार और टेक्नॉलजी) का इस्‍तेमाल कैसे किया जा सकता है ? निर्णय लेने की प्रक्रिया में नागरिक-हितधारकों को कैसे शामिल किया जा सकता है ? विकास योजनाओं को सरकार के विभिन्न स्तरों पर और अधिक भागीदार कैसे बनाया जा सकता है ? प्रशासन को और अधिक अच्‍छा बनाने में ना‍गरिक किस तरह बदलाव ला सकते हैं ?

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10. कौशल युवा – कौशल विकास के माध्यम से उत्तर प्रदेश के युवाओं के रोजगार की क्षमता में वृद्धि

देश में बेरोजगारी की दर 4.4% है, जबकि अगस्त 2017 के आंकड़ों के अनुसार उत्‍तर प्रदेश में 6.6% आबादी वर्तमान में बेरोजगार है। हाल के दिनों में आमतौर पर देखने में आया है कि अधिक पढ़े-लिखे लोग, यहां तक कि एम॰ए॰ और पी॰एच॰डी॰ वाले भी, ऐसी नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं जिनके लिए उनकी शिक्षा बहुत अधिक है और वे उसके लिए प्रशिक्षित भी नहीं हैं।

महिला मजदूरों की भागीदारी के मामले में उत्तर प्रदेश की दर सबसे कम केवल 11.2% है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 23.8% है और छत्तीसगढ़ में काफी ज्‍यादा 54.3% है। यह स्पष्ट है कि अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं को जागरूकता की कमी के कारण उपलब्ध अवसरों की जानकारी ही नहीं है, साथ ही साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल की कमी भी है जो आज बाजार में युवाओं को अधिक रोजगार प्रदान करता है।

उत्तर प्रदेश में माध्यमिक और आगे की शिक्षा के बाद उपलब्ध रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है ? युवाओं को उपयुक्‍त व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के लिए कैसे मार्गदर्शन दिया जा सकता है जो उन्‍हें विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार दिलाने में सहायक होगा ? सरकार क्‍या कदम उठा सकती है जिससे युवाओं को रोजगार के उन अवसरों के बारे में पता चले जो कौशल विकास पाठ्यक्रमों की मदद से उपयुक्‍त योग्‍यता प्राप्‍त करने के बाद उनके पास आएंगे ? सरकार द्वारा संचालित कौशल विकास योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ाई जा सकती है ?

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11. अपना घर – उत्तर प्रदेश में सभी के लिए आवास सुनिश्चित करना

उत्‍तर प्रदेश में गरीबों की लगभग 10 लाख झुग्गियां (कुल 999, 091) हैं, जिनके लिए तुरंत आवास की जरूरत है। सरकार का मानना है, ‘पर्याप्‍त आवास उपलब्‍ध कराना गरीबी कम करने का एक प्रभावी साधन है क्योंकि आवास आम तौर पर परिवारों के लिए सबसे महंगी चीज है।’ इस बार की जनगणना के अनुसार, स्‍लम आबादी के लिहाज से उत्‍तर प्रदेश का देश में चौथा स्‍थान है, जहां 293 कस्‍बों में करीब 60 लाख की आबादी रहती है। शहरों में रहने वाली करीब 24% गरीब आबादी अस्‍थायी झुग्गियों में रहती है।

इन सुविधाओं के बिना लोगों की सेहत पर असर पड़ता है और जीवन स्‍तर में गिरावट आती है और खर्चा बढ़ता है जिसके कारण वे गरीबी से बाहर नहीं आ पाते। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्‍ध कराने की दिशा में काम करने का निर्णय लिया है। हालांकि इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने की राह में कुछ गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

शहरी नियोजन में नवपरिवर्तन के जरिए भूमि की कमी से कैसे निपट सकते हैं ? योजना में भाग लेने के लिए निजी खिलाड़ियों को कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है ? भूमि रिकॉर्ड डेटा को और अधिक विश्वसनीय बनाने में टेक्नॉलजी का लाभ कैसे उठाया जा सकता है ?